बहुत समय से सुन रखा था के कुछ " ब्लॉग " वगैरह भी होता है , कभी प्रयत्न न किया इस दिशा में , तकनीक और उसके नित नवीन प्रयोगों के विषय मे मैं कुछ प्रमादी ही हूँ , आज सहसा ये ब्लॉग का द्वार भी अनजाने में खुल गया , करने गया था gtalk डाउनलोड और ये भी दिख गया मुझे ब्लॉग का कोना , सो इसे भी शुरू कर लिया !!
अनेक विषय हैं अनेक बातें हैं , अब सिलसिला चल पडा है सो लगता है आगे भी बढेगा | मैं आर्य समाज से और संस्कृत से जुड़ा हूँ अतः इन विषयों पर पहले चर्चा करूँगा और ऑरकुट की पृष्ठभूमि से उठने वाले प्रश्नों की छाया इन आगामी चर्चाओं में वरीयता पायेगी | इस नवीन क्षेत्र में पदार्पण करते हुए मैंने " अथ " शब्द का प्रयोग किया है जो आर्ष रीति में ग्रन्थारम्भ करने का एक शुभद सार्थक शब्द है , मुझे शुरुवात इसी शब्द से करना उचित जान पडा | शेष लेखन टिप्पणियाँ आने के बाद !! शुभं तावत्