Saturday, December 11, 2010

!! नमस्ते परब्रह्मणे !!

सभी पाठकों को मेरा सादर नमस्कार !!

बहुत समय से सुन रखा था के कुछ " ब्लॉग " वगैरह भी होता है , कभी प्रयत्न न किया इस दिशा में , तकनीक और उसके नित नवीन प्रयोगों के विषय मे मैं कुछ प्रमादी ही हूँ , आज सहसा ये ब्लॉग का द्वार भी अनजाने में  खुल गया , करने गया था gtalk डाउनलोड और ये भी दिख गया मुझे ब्लॉग का कोना , सो इसे भी शुरू कर लिया !!

अनेक विषय हैं अनेक बातें हैं , अब सिलसिला चल पडा है सो लगता है आगे भी बढेगा | मैं आर्य समाज से  और संस्कृत से जुड़ा हूँ अतः इन विषयों पर पहले चर्चा करूँगा और ऑरकुट की पृष्ठभूमि से उठने वाले प्रश्नों की छाया इन आगामी  चर्चाओं में वरीयता पायेगी | इस नवीन क्षेत्र में पदार्पण करते हुए मैंने " अथ " शब्द का प्रयोग किया है जो आर्ष रीति में ग्रन्थारम्भ करने का एक शुभद सार्थक शब्द है , मुझे शुरुवात इसी शब्द से करना उचित जान पडा | शेष लेखन टिप्पणियाँ आने के बाद !! शुभं तावत्

8 comments:

  1. स्व॒स्ति न॒ऽइन्द्रो॑ वृ॒द्धश्र॑वाः स्व॒स्ति नः॑ पू॒षा वि॒श्ववे॑दाः स्व॒स्ति न॒स्तार्क्ष्यो॒ऽअरि॑ष्ट्टनेमिः स्व॒स्ति नो॒ बृह॒स्पति॑र्द्दधातु ||

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  2. श्री गणेशाय नम: !!!!श्री गणेशाय नम:!!! श्री गणेशाय नम:!!
    हर हर महादेव

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  3. आ नो भद्राः क्रतवो यन्तु विश्वतः।।

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  4. Thanx for the invitation...M damn interested in Arya Samaj...I think we must discuss the Viability & sustainability of Arya Samaj in Modern World...mujhe lagta hai its the need of hour to formulate the methods so that teachings or Arya samaj & Swami Dayanand Saraswati can be made inline with the modern day life.
    Jai Hind

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  5. hindi sahitameva samskritepi likhatu bhrata:)shobhanam karyam:) shubham bhooyaatll

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  6. atha ye shabda mangalvachak bhi he aur shankar bhasya me uska artha he - 'anantara-vachak- yane ki 'iske bad'-is sambandh me

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  7. Namaste! Atha se aarambh kiya par kabhi iti na ho, is aasha ke saath bahut saario shubhkaamanayein aur asha hai ki bina aur pramaad ke vichar vinimay hota rahega!

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  8. मंगल सूचक मन्त्रों और वाक्यों के साथ प्रतिक्रया देने के लिए मैं मोहित जी और गोपाल जी का धन्यवाद करता हूँ |

    और नारायण महाशय का तो मैं बहुत बहुत आभारी हूँ के उन्होंने मेरे इस क्षुद्र प्रयत्न को देखा और मंगल आशीष भी दिया |

    वेदवीर जी का कथन तो मानो हम सभी के ह्रदय का ही उद्गार हो |

    भगिनी श्री निधि !!निश्चयेन अहं संस्कृतेन अपि लेखनं करिष्यामि एव , इदानीं तु " प्रायोगिक " रूपेण हिन्दी भाषायां लिखामि |

    आणि रोन्या !! तू सुद्धा सुरु काही लेखाण वगरे !! फार हाल झालेत आपल्या धर्माचे आणि ब्राह्मणांचे सुद्धा !!

    मित्र जी !! बस आप लोगों का शुभाशीष है !!


    सनातन धर्म को सनातनत्व देने वाली एक शब्द राशि है , जिसका नाम वेद है !!
    हम अपनी चर्चा इसी से शुरू करना चाहते हैं !!

    क्यूँ न इसे संवाद रूप में शुरू करें !!
    कहिये क्या कहते हैं ?




    सभी मित्रों को पुनः एकत्र नमन और धन्यवाद

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